MISUSE OF LAW IN INDIA : Increase in False Cases

MISUSE OF LAW

MISUSE OF LAW IN INDIA: Increase in False Cases of Rape and Eve-Teasing. Hindi Movie Fadfadaa is a Revenge Story of an Innocent man who is charged in False Rape Case.

MISUSE OF LAW in India increases rapidly because of Increase in False Cases of Rape and Eve-Teasing.

In today’s scenario, menace of false eve-teasing, sexual harrassment and rape cases are becoming too common. Among all the efforts to make india a safe place for women to live, the biggest obstacle to tackle is woman who play with laws and public sentiments for personal agenda.

After 2012 Delhi gang rape, many false cases of rapes were filed to get the same sympathy and attention. Police records show that 10 percent of the rape charges filed are false while more than 33000 rape cases are filed everyday in india, think of the men who get falsely convicted everyday by the society.

We see many video of women giving false rape charges threat to man to put pressure on him, to make him do what she wants.

Recently a video went viral where a woman was giving false rape charge threat to bank employees ( who came for loan recovery) and the scared men pleaded with joined hands, touched her feet not to do that.

Many cases come ahead today where women falsely accuse men for material gains, alibi, revenge, to get away with loan money and sometimes to deliberately denigrate the image of a good man in the society and to mentally disturb him.

For a long time, false charges of rape or eve-teasing have been taken lightly by the court but they are extremely cruel because “a man is guilty until proven innocent”. Such false charges many a times have false witnesses too and then there is no place for a man other than jail but what happens when the charges are proved false is equally worse.


The woman gets away with it most of the times and the man’s life is destroyed forever. He is disregarded by his own family, he loses all his friends, he cannot get a job, he cannot live a day without being judged with flesh eating eyes and abusing mouths. Social media and news platforms have intensifies the sufferings of these victims.

There are many false charges that go viral across the social media and then the victims are discussed, called with names everyday on the tv, are chased by the cameras everywhere, given murder threats, people pelt stones on them and their houses. Think, what mental pain they go through everyday, the agony they face by every person.

In may 2020, Manav Singh, a student of class 12th committed suicide after being accused by a girl of sexual assault on social media, that boy was later proved innocent. Saravjeet singh, another victim of this menace, who struggled 3 years to get acquitted because jasleen kaur did not attended the court hearings. He was called eve-teaser, pervert, falsely accused of sexual harrassment on a traffic signal in west delhi, via a facebook post where she also put a picture of him clicked at the signal. Seeing a potential viral story for TRP, every media house ran that aggressively and in few hours he lost his dignity.

A delhi high court in 2017 said, “false rape charge humiliates a person and harms his reputation and a woman cannot escape criminal proceedings for the offence and such cases waste the precious judicial time by making a mockery of the system in which the police authority is also used on false information for which stern action must be taken”. But we all know how much is said and how much is done in india. The thing is where women today are still struggling to get equal rights to men, some women are taking advantage of the emotional support they have and then the question arises on the credibility of genuine rape charges and strong laws against rape accused. The menace of false rape accusations is equally heinous as rape and there is a need to put early check on this rising crime which may destroy fabric of society.

Though there is very less we can do to stop women who put false charges but the govt must put such women behind bars for perjury and mockery of court and misuse of law in India (See Video) and we, as a society need to respect every man before judging him, media trials have to stopped and we must not forget that every man is innocent until proven guilty by the law.

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Misuse of Law ¦ कानून का दुरुपयोग

Misuse of Law

Misuse of Law – कानून का दुरुपयोग

बलात्कार और छेड़खानी के झूठे मामलों में वृद्धि । प्रभात कुमार मिश्रा द्वारा निर्मित हिन्दी फिल्म “फड़फड़ा” एक निर्दोष व्यक्ति की फड़फड़ाहट दर्शाती है जो बलात्कार के झूठे आरोप में सात साल की सजा भुगत कर आया है ।

Misuse of Law – कानून का दुरुपयोग देश में दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है । बलात्कार और छेड़खानी के झूठे मामलों में वृद्धि इसका ज्वलंत उदाहरण है ।

आज के परिदृश्य में, ईव-टीजिंग, यौन उत्पीड़न और बलात्कार के झूठे मामलों में वृद्धि हो रही है। भारत को महिलाओं के रहने के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाने के सभी प्रयासों के बीच, सबसे बड़ी बाधा महिला ही है जो व्यक्तिगत एजेंडे के लिए कानूनों और सार्वजनिक भावनाओं के साथ खेलती है।

2012 के दिल्ली सामूहिक बलात्कार के बाद, सहानुभूति और ध्यान आकर्षित करने के लिए बलात्कार के कई झूठे मामले दर्ज किए गए। पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि दर्ज किए गए बलात्कार के आरोपों में से 10 प्रतिशत झूठे हैं, जबकि 33000 से अधिक बलात्कार के मामले भारत में हर रोज दर्ज किए जाते हैं, उन पुरुषों के बारे में सोचें जिन्हें समाज द्वारा हर रोज गलत तरीके से दोषी ठहराया जाता है।

हम देखते हैं कि कई महिलाएं झूठे बलात्कार के आरोप लगाती हैं, वो आदमी पर दबाव बनाने के लिए धमकी देती हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जहां एक महिला बैंक कर्मचारियों (जो ऋण वसूली के लिए आए थे ) को झूठे बलात्कार का आरोप की धमकी दे रही थी और डरे हुए पुरुषों ने हाथ जोड़कर विनती की कि ऐसा न करने के लिए उसके पैर छुए। कई मामले आज भी सामने आते हैं जहां महिलाएं पुरुषों पर भौतिक लाभ, शादी का दबाव बनाने, बदला लेने के लिए, लोन के पैसों से छुटकारा पाने के लिए और कभी-कभी जानबूझकर समाज में एक अच्छे आदमी की छवि को बदनाम करने और उसे मानसिक रूप से परेशान करने के लिए आरोप लगाती हैं।

लंबे समय तक, बलात्कार या छेड़खानी के झूठे आरोपों को अदालत ने हल्के ढंग से लिया है, लेकिन ये बेहद निर्दयता हैं क्योंकि “एक आदमी निर्दोष साबित होने तक दोषी है”। इस तरह के (Misuse of Law) झूठे आरोप व झूठे गवाह होनेे से एक निर्दोष व्यक्ति सजा भुगतने को मजबूर हो जाता है और फिर जेल के अलावा उस के लिए कोई जगह नहीं होती है।

लेकिन जब आरोप झूठे साबित हो जाते हैं तो क्या होता है। आरोप लगाने वाली स्त्री को कोई फ़र्क नहीं पड़ता लेकिन पुरुष का जीवन हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है। उसे अपने ही परिवार से अवहेलना का सामना करना पड़ता है, वह अपने सभी दोस्तों को खो देता है, उसे नौकरी नहीं मिल सकती है । सोशल मीडिया और न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म ने इन पीड़ितों की पीड़ा को तीव्र कर दिया है। कई झूठे आरोप हैं जो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं और फिर पीड़ितों पर चर्चा की जाती है, जिन्हें टीवी पर हर रोज़ नामों के साथ बुलाया जाता है, हर जगह कैमरों द्वारा पीछा किया जाता है, हत्या की धमकी दी जाती है, लोग उन पर और उनके घरों पर पत्थर फेंकते हैं। सोचिए, हर रोज़ वे किस मानसिक पीड़ा से गुज़रते हैं।

मई 2020 में, सोशल मीडिया पर एक लड़की ने 12 वीं कक्षा के छात्र मानव सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जिसके बाद मानव ने आत्महत्या कर ली, वह लड़का बाद में निर्दोष साबित हुआ। इस खतरे का एक और शिकार, सर्वजीत सिंह, जो 3 साल संघर्ष करने के बाद बरी हो गया क्योंकि जसलीन कौर अदालत की सुनवाई में शामिल नहीं हुई थी। उन्हें फेसबुक पोस्ट के माध्यम से पश्चिम दिल्ली में एक ट्रैफिक सिग्नल पर यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाया । टीआरपी के लिए एक संभावित वायरल कहानी देखकर, हर मीडिया हाउस ने आक्रामक रूप से भाग लिया और कुछ ही घंटों में उन्होंने अपनी गरिमा खो दी।


2017 में एक फैसले में उच्च न्यायालय ने कहा, “झूठे बलात्कार का आरोप एक व्यक्ति को अपमानित करता है और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है और एक महिला अपराध के लिए आपराधिक कार्यवाही से बच नहीं सकती है और इस तरह के मामले सिस्टम का मजाक बनाकर न्यायालय व पुलिस प्राधिकरण का कीमती समय बर्बाद करते हैं। झूठे आरोप लगाने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए “। लेकिन हम सभी जानते हैं कि भारत में कितना कहा जाता है और कितना किया जाता है। यह वह जगह है जहां महिलाएं आज भी पुरुषों के समान अधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, कुछ महिलाएं उनके द्वारा दिए गए भावनात्मक समर्थन का लाभ उठा रही हैं और फिर यह सवाल असली बलात्कार के आरोपों और बलात्कार के आरोपियों के खिलाफ मजबूत कानूनों की विश्वसनीयता पर भी उठता है।

झूठे बलात्कार के आरोपों का खतरा बलात्कार की तरह ही जघन्य है और इस बढ़ते अपराध पर जल्द जाँच करने की आवश्यकता है जो समाज के ताने-बाने को नष्ट कर सकता है। सरकार को ऐसी महिलाओं को Misuse of Law – कानून का दुरुपयोग करने के लिए सलाखों के पीछे रखना चाहिए। आज समाज को हर आदमी को न्याय करने से पहले उसका सम्मान करने की ज़रूरत है, मीडिया ट्रायल को रोकना होगा और हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कानून द्वारा दोषी साबित होने तक हर आदमी निर्दोष है।


प्रभात कुमार मिश्रा द्वारा निर्मित हिन्दी फिल्म “फड़फड़ा” एक निर्दोष व्यक्ति की फड़फड़ाहट दर्शाती है जो बलात्कार के झूठे आरोप में सात साल की सजा भुगत कर आया है ।

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Nudity Drugs and Prostitution in Film Industry

Nudity Drugs  and Prostitution

Nudity Drugs and Prostitution are common in movies today but they are more common for Earning money and getting a role in Real Life of the film industry.

Indian film industry is a multi-million dollars industry producing an average of 1800 films per year. Movie actors and actresses not only bring fame to india through cinema but also represent India across the world in various international platforms and organisations.

Although from outside, our film industry seems to be a perfect world of lights and beauty but the reality inside is pretty far from it.

There was a time when audiences used to think that any character played by an actor was his true self and they used to admire those actors who played the role of a hero in movies and detest actors who played a villain or any negative role. And this feeling used to be very deep before but today, we, with all the paparazzi and social media, know very well about the actors and what is going on in their lives and with whole lot of film industry gossip channels, we get to know their true selves.


Today every actor’s private life, his habits, addictions and other businesses comes to audience’s knowledge frequently and so the not so bright side of film industry.

Nudity Drugs and Prostitution are common in movies today but they are more common in the film industry. Bollywood recently came under highlight when Kangna Ranaut said that 90% of the bollywood is drug addict and this news is no surprise as India has a widespread drug problem.

It’s obvious that after all the struggles and then sudden whole lot of money and insane fame take many stars to this road. From debutant actors to big stars, everybody in the line has been accused of being involved in the drug and prostitution rackets. These things may not come daily on news and people are arrested and released because of deep connections with politicians and media houses but are exposed now and then and then a layman, a die hard fan of a star gets to know the dark side of the film industry; a flawed world of gloominess and thirst for money and fame.

It’s well known how rapidly success changes into losses in bollywood, a big box office star could give a statement or have an argument with an influencer and with all the politics his next movie will be a flop or he will never get another chance there.

And again with these highs and lows and easily accessible drugs, it becomes an outsider’s only friend among the strangers, this is a whole big vicious circle. It seems so strange how this forever growing family (as they call it in award nights) rarely supports each other, going ahead of their personal gains.

Bollywood is not only a drug user but also has people who run a drug cartel across the big city and state. These illegal businesses give a whole lot of money thus power to them across the country.

Prostitution brings yet another ill fame to this industry. Earning money and getting a role through nudity and prostitution is common in all the film industries since their onset and it will be a part of it until unless people in power care for real talent. Here prostitution has mainly two forms in the film industry – 1) man or woman who put their foot on the ladder of selling their bodies to everybody to reach the top. 2) business of selling new struggling actresses to the foreigners with bait of getting fame.

Now-a-days, news of actresses involved in sex scandals are on the rise. Time and again there have been reports of some actresses or the other running brothels or being involved in sex trade, especially in tamil and telugu industry. And here again it flashes us the murky side of show business.

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Prime Video India ¦ सुकून के पल

इंडियन प्राइम वीडियो के संग सुकून के पल

सुकून के पल इंडियन प्राइम वीडियो के संग

Indian Prime Music Video दिन भर के काम के बाद जब आप घर आते हैं और आप बस अपने सोफे पर लेटना चाहते हैं और यूट्यूब पर एक दिल बहलाने की सामग्री देखना चाहते हैं, तो इंडियन प्राइम वीडियो आपको सुकून देता है। यह आपको कॉमेडी, क्राइम थ्रिलर, कविता, एडल्ट कॉमेडी, आइटम सॉन्ग, रोस्ट वीडियो, न्यूज एनालिसिस, हेल्थ इश्यू से जुड़े वीडियो आदि सहित कई प्रकार की सामग्री प्रदान करता है। इंडियन प्राइम वीडियो यूट्यूब चैनल की शुरुआत प्रभात कुमार मिश्रा ने 2017 में  प्रभात प्रोडक्शंस की सहायक कंपनी के रूप में की थी। आज इसके 9 हज़ार से अधिक सब्सक्राइबर हैं।

इसकी फिल्मों और गीत वीडियो के लिए प्रतिभाशाली और समर्पित अभिनेताओं और गायकों की एक बड़ी टीम है;  जेैसे  वैशाली पाटिल, कविता उनियाल, राजा भार्गव, प्रमोद कुमार, राकेश कुमार, जसमेर, रवीश डोगरा, प्रवेश बब्बर, अशोक दत्ता, आकृति सिन्हा।इंडियन प्राइम वीडियो हमेशा एक रचनात्मक वीडियो के साथ आता है ताकि आप या तो इसके वायरल “फड़फड़ा” वीडियो सॉन्ग को दिखा सकें जो एक व्यक्ति बदला लेने के लिए किस हद तक जा सकता है या अपराधिक थ्रिलर “सनकी नंबर 1” जो अपने सर्वश्रेष्ठ नाटकीयता को चित्रित करता है मनोवैज्ञानिक थ्रिलर वीडियो में। इंडियन प्राइम वीडियो हमेशा आपकी खूबसूरत रातों के लिए होता है जैसे “सनम है पत्थर का” जैैैास खूबसूरत गमगीन गीत। यह शुद्ध शाश्वत प्रेम दर्शाता है ।

इंडियन प्राइम वीडियो आपको देश के हर कोने से लोकप्रिय समाचारों के बारे में जानकारीपूर्ण वीडियो प्रदान करता है। इसने “देेेसपासितो” जैसे विभिन्न विदेशी गीतों से बना हुआ वीडियो भी बनाया है, जिसका नाम है “प्यूडीपाई देसपासितो”।


इंडियन प्राइम वीडियो एक तेजी से बढ़ता हुआ मनोरंजक यूट्यूब चैनल है जो आपको छोटी लेकिन उच्च गुणवत्ता वाली मूल सामग्री देता है जिसको कभी भी, कहीं भी  देेखा जा सकता है। यह वास्तविक लोगों और उनके जीवन से जुड़ी फिल्मों का निर्माण करता है। यह चैनल ज्यादातर उपेक्षित, अप्रिय और जटिल जीवन स्थितियों के बारे में बात करता है। ये चैनल एक व्यक्ति की भावनाओं पर केंद्रित है, जिसे दिन-प्रतिदिन के जीवन में आंखों से नहीं देखा जा सकता है। 

इस चैनल में ऐसी सामग्री है जो ताज़ा और दिलचस्प है। इस चैनल का हर वीडियो आपको कुछ सोचने पर मजबूर कर देता है और यह सिर्फ एक क्लिक दूर है।

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Time to Watch for Time Pass | Entertainment Begins

Time to Watch for Time Pass

It’s Time to Watch for Time Pass, After a long day when you come home and you just want to lie on your couch and watch a light hearted content on you tube, Indian prime video comes to your rescue.

We say Time to Watch for Time Pass because It provides you a wide variety of content including comedy, crime thriller, poetry, adult comedy, item songs, roast videos, news analysis, videos related to health issue etc.

Indian prime video you tube channel was started by multitalented Prabhat kumar mishra in the year 2017, as a subsidiary of Prabhat Productions.

Today it has more than 8.9K subscribers. It has a large team of talented and dedicated actors and singers for its movies and song videos; Vaishali Patil, Kavita Uniyal, Raja Bhargava, Pramod Kumar, Rakesh Kumar, Jasmer, Ravesh Dogra, Pravesh Babbar, Ashok Dutta, Akiriti Sinha to name a few.

Indian prime video always comes with a creative video to amuse you either its viral “Fadfadaa” video song that shows the extent to which a person can go to take revenge or the electrifying crime thriller “Sanki No. 1” that depicts its best theatrical work in the psychological thriller video.

Indian prime video is always there for your lonely nights with beautiful sad poetry like “Sanam hai pathar ka”. It creates content like “Jab se dekha” and “Reallise — Duvidha – Doraha” about pure eternal love and short sensual adult movies about the flawed relationships between couples and their love affairs.

Indian Prime Video provides you informative videos about popular news from every corner of the country in the most entertaining way. It has also made a roast video of various foreign songs like “Despacito” named “PewDiePie Despacito”.

Indian prime video is a fast growing entertaining you tube channel that gives you short but high quality original content that can be consumed anytime, anywhere. It takes ideas for movies from real people and their lives. It talks about mostly ignored, unpleasant and complicated life situations. Indian prime video focuses on the deep rooted feelings and emotions of a person which cannot be observed with naked eyes in day to day life. Indian prime video has content that is fresh and interesting. Every video of Indian prime video leaves you with a hard laugh and it is just a click away.

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Wave of Fame Viral Song Fadfadaa

Crime Alert TV Viral Video

Wave of Fame : Viral Song Fadfadaa

Glowing Star – Prabhat Kumar Mishra

Wave of Fame Viral Song Fadfadaa
Fadfada Bhai Fadfada

Wave of Fame starts with Viral Song Fadfadaa when Glowing Star Prabhat Kumar Mishra perform. Song is Sung, Written, Composed and Choreographed by Prabhat Kumar Mishra. The song highlights are use of Thumb, use of Push & Pull and use of Neck in new Dance Style “Fadfadaa”. Any Body Can Dance on this Fadfadaa Dance Style. Lungi Dance become past because of Fadfadaa Dance.

Brands, services, celebrities and even law enforcement agencies on Saturday jumped on to the #Fadfadaa meme bandwagon — a bizarre, though hilarious trend sparked off by a single youtube comment.

The trend sparked off after YouTube channel Indian Prime Video uploaded a video where the channel creators Prabhat Kumar Mishra explored the comment section on their videos. Under thousands of videos, people noticed a comment by #Fadfadaa, who just wrote Hindi Film “Fadfadaa” name after viewing Title Song of the Movie as the comment. This Film will be released in 2021 in all over World.

Soon, many Indian YouTubers noticed Fadfadaa being written all over their comments. From there, the trend picked up and dominated social media. Afterthat all Youtubers Roast Fadfadaa title song. Soon, many searching keywords goes trending like “Fadfada”, “Fadfada Bhai Fadfada”, “Fad Fad Fad Fadfada”, “Phadphada”, “Phadphada” and many more keywords.

The trend dominated Roasters and become viral on Social Media. Also various brands and services stepping in to use it for promotions, and police forces using it to spread awareness.

Many internet users jumped up the bandwagon by changing its official username / nickname to Fadfadaa on the suggestions of the friends.

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Indian Prime Video YouTube Channel

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घर से काम – जीवनशैली पर प्रभाव – Work from Home

घर से काम – जीवनशैली पर प्रभाव

घर से काम करने पर हमारी जीवनशैली पर प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही होंगे। दुनिया भर में घर से काम करने की अपनी सकारात्मकता है, और भविष्य में नकारात्मक प्रभाव भी होंगे। अब यह केवल समय की बात है जिसमें भारत घरेलू कार्यबल से एक कुशल कार्य के रूप में विकसित होगा।

COVID-19 महामारी के कारण दुनिया अचानक बदल गई। जीवन को गियर से बाहर निकाल दिया गया था और सामाजिक भिन्नता नया आदर्श बन गई थी। COVID-19 ने लोगों को अपना जीवन अपने घरों की सीमाओं तक सीमित रखने के लिए मजबूर किया है। देश का लगभग पूरा कार्यबल घर से ही काम कर रहा है। दुनिया ने कभी इस परिमाण का अभ्यास नहीं देखा था। पिछले कुछ महीनों में लोगों ने सीखा है कि ज्यादातर काम घर से किए जा सकते हैं।

हालांकि, घर से काम करने के कुछ हफ्तों के रूप में जो शुरू हुआ उसने काम के भविष्य को बदल दिया है। ऐसा कहा जाता है कि भारत में कंपनी का 25-30% कार्यबल चालू वित्त वर्ष के अंत तक घर से काम करना जारी रख सकता है और उम्मीदें हैं कि भविष्य ‘भौतिक’ और ‘दूरस्थ’ कामकाज का मिश्रण होगा। जब हम विभिन्न उद्योगों के विविध कार्य बल को देखते हैं, तो कुछ कार्य ऐसे होते हैं जो घर से नहीं किए जा सकते हैं, जैसे कि डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करने वाले लोग, या सौंदर्य सैलून में काम करने वाले लोग या होटलों और रेस्तरां में काम करने वाले लोग। इसलिए, अब समय आ गया है कि हम वास्तव में घरेलू जीवनशैली के किसी काम को देखें।

जो लोग घर से काम कर रहे हैं, उन्हें संचार में निपुण होने की आवश्यकता है और उन्हें उस काम के लिए अच्छी तरह से पुन: पेश होना चाहिए जो वे करने वाले हैं। जब पूरी कंपनी घर से काम कर रही होती है, तो फ्रेम में विश्वास पैदा करने का सवाल आता है। अब तक, सभी नियोक्ता घर के सुसंगत और सुचारू रूप से काम करने के इच्छुक हैं, दूरदराज के काम के माहौल में प्रबंधक और कर्मचारियों के बीच विश्वास विकसित करना आवश्यक है। कर्मचारियों को सहयोग करने की अनुमति देने के अलावा, कंपनियों ने कर्मचारियों को महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच प्रदान की है।

आज, हमारे पास भारत को अधिक समावेशी बनाने का एक बड़ा अवसर है। सरकार की भूमिका है। कुछ कदम उठाए गए हैं, जिनमें भारत नेट के माध्यम से गांवों तक अंतिम मील की कनेक्टिविटी शामिल है। प्रत्येक और हर घर में इंटरनेट की उपलब्धता, गैजेट्स के साथ काम करना पहली और प्रमुख प्राथमिकता है। और इनमें से कुछ सुविधाओं का क्रियान्वयन विभिन्न राज्यों में बहुत ही तीखा रहा है। और जब तक ऐसा नहीं होता है, तब तक भारत के “घर से काम करने” का कोई भविष्य नहीं है।

कुछ कंपनियों के लिए घर से काम करना कोई नई अवधारणा नहीं है, लेकिन कोविद -19 ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है। घर की व्यवहार्यता और आराम से काम कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि आप कहाँ रहते हैं, ग्रामीण या शहरी और जिस राज्य से आप हैं, आपकी सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि आदि आदि।

भारत में घर से काम आने वाले समय में सामाजिक मानदंडों में एक बड़ा बदलाव लाएगा। साल, जो महिलाएं घर से काम करती हैं और घरेलू काम भी करती हैं, उन्हें कार्यस्थल की जिम्मेदारियों के साथ संयोजित करने के लिए और अधिक कठिन होने जा रहा है। यह न केवल कार्यालय कर्मियों बल्कि प्रमुख शिक्षकों, और शिक्षक और छात्रों के संबंधों को प्रभावित करता है। वह शिक्षक जो किसी भी पद्धति से पढ़ा सकती है / वह बच्चों के साथ या जिस तरह से वह / वह बच्चों को संभालती है, उसके साथ सहज है और अब माता-पिता द्वारा लगातार न्याय किया जाएगा। यह शिक्षक और छात्र के बीच एक बड़ा अंतर भी लाता है।
जबकि कुछ घर से काम करना पसंद करते हैं, दूसरों को पेशेवर काम करने की जगह याद आती है, माहौल भी काम की दक्षता को प्रभावित करता है।

कार्य क्षेत्रों में, लोग न केवल काम करते हैं, वे अपने सहयोगियों के साथ बातचीत करते हैं और न केवल काम पर चर्चा करते हैं बल्कि अपने चढ़ाव और ऊंचे हिस्से को साझा करते हैं। मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं, हम जो बहुत काम करते हैं उनमें एक-दूसरे के साथ बैठना, एक-दूसरे से बात करना और एक-दूसरे से सीखना शामिल है। शिक्षा में, कक्षा के बाहर बहुत कुछ सीखने को मिलता है। ऑनलाइन शिक्षण उस क्षेत्र को पूरी तरह से बंद कर देता है। यह बच्चों के सामाजिक और व्यवहारिक विकास को प्रभावित करेगा, दोस्त बनाने की मूल कला, विश्वास निर्माण, मदद और इतने पर।

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Work from Home : Future of Livelihood

Will work from home be the future of earning a livelihood?

The world changed suddenly due to the COVID-19 pandemic. Life was thrown out of gear and social distancing became the new norm. COVID-19 has forced people to restrict their lives to the confines of their homes. Almost the entire workforce of the country is doing work from home. The world had never seen an exercise of this magnitude. People over the last few months have learned that most work can be done from home.

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However, what started as a few weeks of working from home has changed the future of the work. It is said that 25-30% of the company’s workforce in India may continue to work from home till the end of the ongoing fiscal year and the expectations are that the future will be a mix of ‘physical’ and ‘remote’ working.

When we look at the diverse work force of various industries, there are some task that cannot be done from home, like people working as delivery agents, or those working in beauty salons or people in hotels and restaurants. So, it’s time now to really look at a work from home lifestyle.

People who are working from home need to be skillful in communication and they must be well resourced for the work they are supposed to do. When the entire company is working from home, there comes the question of building trust in the frame. As of now, all the employers are keen on making work from home coherent and smooth, developing trust between manager and employees in a remote working environment is necessary. Apart from giving employees with permission to work in collaboration, the companies have provided employees access to the significant and sensitive information.

Today, we have a great opportunity to make India more inclusive. The government has a role to play. Some steps have been taken, including last-mile connectivity to the villages through Bharat Net. Availability of internet to each and every household, along with the gadgets to work are the first and foremost priority. And the implementation of some of these facilities has been very patchy across different States. And untill unless this does not happen there is no future of “working from home” India.

Work from home is not a new concept to some companies, but Covid-19 has hastened the process. Feasibility and comfort depends on various factors like where you live, rural or urban and the state you are from, the social and economic background of yours etc.

Work from home in India would bring a major change in social norms in the coming years, women who work from home and do domestic work also are going to be more hard pressed to combine it with the workplace responsibilities. Not only this affects office workers but majorly teachers, and teacher and students relationship. The teacher who can teach with any method she/he is comfortable with or the way he/she handles the children, is now and will be constantly judged by the parents. This also brings a big gap between teacher and student.

While some love to work from home, others miss the professional working space, the ambience also affects the efficiency of work. In work areas, people not only work, they interact with their colleagues and not just discuss work but share their lows and highs.

Human beings are social creatures, a lot of work we do includes sitting with each other, talking to each other and learning from each other. In education, a lot of learning happens outside the classroom. Online teaching closes that field completely. It would affect the social and behavioural growth of children, the basic art of making friends, building trust, helping and so on.

Work from home in all over the world has its positives, and negatives that could be worked out. It’s now just a matter of time in which India would evolve to be an efficient work force.

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